सरल भाषा, आकर्षक चित्रों, मधुर संगीत और मज़ेदार ध्वनि-प्रभावों के साथ प्रस्तुत यह कालजयी परीकथा "राजकुमारी और मटर का दाना" बच्चों को मनोरंजन और कल्पना की अद्भुत दुनिया में ले जाती है। राजकुमार फास्टिडियस अपनी आदर्श राजकुमारी की तलाश में पूरी दुनिया घूमता है, लेकिन उसे कोई भी पूरी तरह उपयुक्त नहीं लगती। कोई बहुत ज़्यादा बोलती है, तो कोई बिल्कुल नहीं बोलती; कोई बहुत बड़ी होती है, तो कोई बहुत छोटी, और कुछ राजकुमारियाँ बहुत नखरे वाली होती हैं या अपने शोर मचाने वाले छोटे-छोटे कुत्तों के साथ आती हैं। तभी एक तूफ़ानी रात में राजकुमारी रोज़ संयोगवश महल पहुँचती है। लेकिन वह रानी को कैसे विश्वास दिलाएगी कि वह सचमुच एक असली राजकुमारी है? रोमांच, हास्य और जादुई घटनाओं से भरपूर इस मनमोहक कहानी का सुखद अंत बच्चों को सच्चाई, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास का संदेश देता है तथा उन्हें जीवनभर पढ़ने का आनंद लेने के लिए प्रेरित करता है।