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राम को छोड़ कर सुमंत अयोध्या लौट आता हैं। उसका खाली रथ देख कर आयोध्यावासियों की निराश और बढ़ जाती हैं। उधर महल में महाराज दशरथ उनके द्वारा अनजाने में हुई मनुष्य हत्या के बारे में बताते है। जिसे सुनकर कौशल्या पशोपेश में पड़ जाती हैं।

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