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प्रिया रमानी एक ऐसी निडर जर्नलिस्ट का नाम है जिसने बोलने की आज़ादी के लिए कमाल की जंग लड़ी. ऐसी जंग, जिसमें जीत लगभग नामुमकिन थी. जिसमें उसके खिलाफ जो खड़े थे, वो हर तरह से साधन-संपन्न लोग थे. जिसने अपने साथ वर्क प्लेस में हुए शोषण को सालों बाद ही सही, लोगों तक पहुँचाना ज़रूरी समझा. और यूँ लाखों महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायी आवाज़ बन गईं. ये अलग बात है कि बदले में उन्होंने defamation केस पाया. लेकिन न वो डरीं न झुकीं. अपने सामने वकीलों की फ़ौज होने बावजूद जीतकर दिखाया. प्रिया रमानी ने जो लड़ाई जीती है, वो sexual abuse के खिलाफ औरतों की लड़ाई में और Me Too movement में एक मील का पत्थर साबित हुई है. उनकी जीत ने ये सुनिश्चित किया है कि सताई गईं, advantage ली गईं औरतें उम्र के किसी भी हिस्से में अपना दर्द बयान कर सकती हैं. एक अकेली प्रिया रमानी ने हज़ारों-लाखों प्रियाओं की राह आसान की है. सुनिए इन्हीं प्रिया रमानी का के असाधारण जंग की अद्भुत कहानी.
