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प्राचीन काल में हमारे ऋषि मुनि, पेड़ पौधों के पत्तों और फूलों से औषधी या दवा बनाते थे. उस वक़्त वो वनों में जाकर, पेड़ पौधों से बात चीत करके, उनको अपना गुरु बनाते हुए, जड़ी बूटी लाते थे.
उन्हीं ऋषि मुनियों की तरह, धरती की हरियाली के साथ-साथ अपने मन की हरियाली को पहचान कर उनसे रिश्ता बनाना, जीवन में संतुलन लाता है.
इसी हरियाली से रिश्ता बनाते हुए, ऋषि मुनि बनकर, चलिए अपने शरीर के अंदर के तनाव, चिंता और निराशा को ध्यान के ज़रिए दूर करते हैं, और पेड़ पौधों की विशालता को हृदय से नमन करते हैं.
पौधों से बात चीत एक ध्यान श्रृंखला है जिसके तीन भाग हैं.
उन्हीं ऋषि मुनियों की तरह, धरती की हरियाली के साथ-साथ अपने मन की हरियाली को पहचान कर उनसे रिश्ता बनाना, जीवन में संतुलन लाता है.
इसी हरियाली से रिश्ता बनाते हुए, ऋषि मुनि बनकर, चलिए अपने शरीर के अंदर के तनाव, चिंता और निराशा को ध्यान के ज़रिए दूर करते हैं, और पेड़ पौधों की विशालता को हृदय से नमन करते हैं.
पौधों से बात चीत एक ध्यान श्रृंखला है जिसके तीन भाग हैं.
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- SeriesPaudhon Se Baat Cheet (Hindi) #3