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रोबर्ट और मीरा जैसे चाँद और बादल. उन दोनों के बीच लुका-छिपी का खेल चलता रहता है. उनकी पहली मुलाक़ात लिफ्ट में होती है. मीरा तो पहली मुलाक़ात में ही रोबर्ट पर फिदा हो जाती है लेकिन रोबर्ट उसे देख कर अनदेखा करता रहता है. वे दोनों दो अलग दुनिया के परिंदे हैं, लेकिन इश्क़, दूरियों से कहाँ रुक पाता है! मीरा की झील जैसी आंखों में डूबने से बचने की कोशिश करता रोबर्ट, क्या मीरा की मासूम मुहब्बत में गिरफ़्तार हो पायेगा? क्या ज़िंदगी की उलझनों में उलझ गई मीरा रोबर्ट पर भरोसा जता पाएगी?
