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स्वर्गविभा ऑनलाइन त्रैमासिक पत्रिका सितम्बर 2025

डॉ. तारा सिंहSeries: स्वर्गविभा त्रैमासिक हिंदी पत्रिका
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स्वर्गविभा वेबसाइट पत्रिका, पिछले 21 सालों से हिंदी को अपनी धमक कायम रखने में, अग्रगामी भूमिका निभाती आ रही ही है इस अंक के लिए संदेश देते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है हमेशा की तरह पत्रिका का यह अंक भी समस्त विश्व को, हिंदी प्रेमियों, अनुसंधानकर्ताओं एवं विद्वानों के विविध कहानियों, गज़लें, आलेखों से अवगत करने का मार्ग प्रशस्त करेगाअनेक लेखकों एवं चिंतकों की रचनाओं को एकत्रित करना, उन्हें अंतिम रूप देकर, पत्रिका के अंकों में सम्मिलित करना, परम्परागत रूप से एक महत्वपूर्ण कार्य रहा है इस वर्ष, किन्हीं कारणवश यह कार्य अपेक्षाकृत बड़ी ही चुनौतीपूर्ण रहा पर मुझे ख़ुशी है कि बावजूद स्वर्गविभा टीम इस अंक को प्रकाशित करने में सक्षम हुई है मेरा मानना है कि इस पत्रिका के माध्यम से जगत को सभी विद्वानों, लेखकों, एवं पाठकों के अनेक लेखकों की रचनाएँ पढ़ने का सुअवसर मिलेगा, तथा इससे ज्ञान का आदान-प्रदान तो होगा ही, इसके साथ हिंदी भाषा के भी प्रचार-प्रसार को विस्तार मिलेगा भाषा के प्रवाह को गति मिलती रहे, तथा हिंदी जगत व शेष के बीच यह पत्रिका सेतु का काम करती रहे, यही आशा हैअंत में मैं पत्रिका के प्रकाशन में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से योगदान करने वाले सभी सदस्यों को इस महत्वपूर्ण कार्य हेतु आभार व्यक्त करता हूँ, और आगे भी यह सहयोग रहेगा, इसी कामना के साथ

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