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प्रेमचंद का गोदान सिर्फ एक उपन्यास नहीं, बल्कि भारतीय समाज का ऐसा आइना है, जिसमें आज भी हम अपने सवालों और संघर्षों के जवाब ढूंढ सकते हैं। यह कहानी है होरी और धनिया की, जो अपने सपनों, संघर्षों और रिश्तों की उलझनों में जीते हैं। यह उपन्यास न केवल किसानों की दयनीय स्थिति का जीवंत चित्रण करता है, बल्कि बदलते हुए शहरी और ग्रामीण जीवन के बीच के टकराव को भी बखूबी प्रस्तुत करता है।
